ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर, खामेनेई के बेटे मोजतबा के सिर सजा ताज; मचेगा बवाल

Mar 04, 2026 06:43 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) चुना गया है। युद्ध के बीच IRGC के दबाव और इस बड़े राजनीतिक बदलाव की पूरी खबर विस्तार से पढ़ें।

ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' (विशेषज्ञों की सभा) ने दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुना है। यह बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद सामने आया है, जिससे ईरान में नेतृत्व का एक बड़ा शून्य पैदा हो गया था।

नेतृत्व का चुनाव और सेना का प्रभाव

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का फैसला: 'ईरान इंटरनेशनल' और अन्य मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट के अनुसार, 88 वरिष्ठ मौलवियों वाली इस सभा ने 56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई को ईरान की कमान सौंपने का निर्णय लिया है।

IRGC का भारी दबाव: सूत्रों का दावा है कि मोजतबा के चुनाव के पीछे ईरान के शक्तिशाली 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) का भारी दबाव रहा है। सेना और IRGC ने युद्ध और संकट के इस समय में मोजतबा को सत्ता के लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित विकल्प माना है।

औपचारिक घोषणा का इंतजार: हालांकि चुनाव की खबरें पश्चिमी और विपक्षी मीडिया में प्रमुखता से सामने आ गई हैं, लेकिन ईरानी प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा होनी अभी बाकी है।

यह फैसला विवादित क्यों माना जा रहा है?

वंशवाद पर सवाल: 1979 की ईरानी क्रांति राजशाही (शाह के शासन) के खिलाफ ही हुई थी। इस्लामिक रिपब्लिक के सिद्धांतों में पिता के बाद बेटे को सत्ता सौंपना (वंशानुगत शासन) सही नहीं माना जाता। यह कदम उन बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ जा सकता है।

धार्मिक पद की कमी: मोजतबा एक मध्य-स्तरीय मौलवी हैं। पारंपरिक इस्लामी मानकों के अनुसार, सर्वोच्च नेता के पद के लिए आवश्यक उच्च धार्मिक और राजनीतिक दर्जा उनके पास नहीं है।

स्वयं अली खामेनेई की अनिच्छा: रिपोर्ट्स के अनुसार, दिवंगत अयातुल्ला खामेनेई ने खुद मोजतबा को अपने उत्तराधिकारियों की संभावित सूची में शामिल नहीं किया था, क्योंकि वे वंशवाद के आरोपों से बचना चाहते थे।

मोजतबा खामेनेई कौन हैं?

पर्दे के पीछे की ताकत: मोजतबा अयातुल्ला खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं। उन्होंने कभी भी कोई औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन उन्हें अपने पिता के कार्यालय का गेटकीपर और एक बेहद प्रभावशाली रणनीतिकार माना जाता है।

सैन्य अनुभव और गठजोड़: उन्होंने 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया था। वर्तमान में IRGC के शीर्ष कमांडरों और कट्टरपंथी गुटों के साथ उनके बेहद करीबी संबंध हैं।

अमेरिकी प्रतिबंध: साल 2019 में अमेरिका ने मोजतबा पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अमेरिका का तर्क था कि बिना किसी आधिकारिक पद के भी वह सर्वोच्च नेता की ओर से महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं।

ईरान इस समय अभूतपूर्व सैन्य और राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच मोजतबा के हाथ में सत्ता आने से यह संकेत मिलता है कि ईरान अपनी नीतियों में कोई नरमी नहीं लाएगा, बल्कि उसका रुख और भी अधिक कट्टरपंथी हो सकता है।

लेखक के बारे में

Amit Kumar

डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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